कशमकश

जिसे पाने की दिल में कोई तमन्ना ही न थी, उसको खोने का आज हमको ये ग़म कैसा।। वो कहते है हमसे तुम इसके काबिल ही न थे, ईल्म उनको हमारी काबीलियत का कैसा।।

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मिज़ाज

हवाओं को दोस न दिजिये मौस़मो के बदल जाने का, उमड़ना घुमडना और फिर बिखर जाना मिज़ाज है ये तो बादलों का।। ©COPYRIGHT 2019 All rights reserved to Writomaniacs.

इंतजार

नजरों में उनकी प्यार तो होगा हमें देखने का इंतजार तो होगा, बेसब़र हो रही हैं फिजायें सारी आज वर्षों बाद हमें भी  उनका दिदार जो होगा। ©COPYRIGHT 2018 All rights reserved to Writomaniacs.

Alone (Fiction)

It's three years passed when I had decided to live alone. From quieting my friends to maintain distance from my relatives. Everything was wonderful, life was going smoothly. I was no more witness to their disturbances. I got a chance to meet me, I learn to enjoy my own company. By doing all this I … Continue reading Alone (Fiction)