Shayari

एहसास

अपने ही होने का खुद एहसास नहीं है मुझको छूकर को ही छूकर देख लेता हूँ मैं अक्सर, शामिल अपनी जिंदगी मे मैं हूँ की नहीं। ©COPYRIGHT 2020 All rights reserved to Writomaniacs.

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निगाहें

फखत देखा था उनकी निगाहों मे इक दफा, किसी और के तसव्वुर मे अब उठती नहीं  निगाहें // Read More- काबिलियत गुमनाम परिंदा मिजाज इंतजार अक्स ©COPYRIGHT 2020 All rights reserved to Writomaniacs.

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काबिलियत

जिसे पाने की दिल में कोई तमन्ना ही न थी, उसे खोने का आज हमको ग़म ये कैसा।। वो कहते है हमसे तुम इसके काबिल ही न थे, ईल्म उनको हमारी काबीलियत का कैसा।। Read more - गुमनाम परिंदा मिजाज इंतजार अक्स ©COPYRIGHT 2020 All rights reserved to Writomaniacs.

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गुमनाम

अकेला ही था मे गुमनाम राहों मे सुनता गया सबकी लिखता गया अपनी, अनजान ही रहा मे उन महफिलों से जहां गूंजता गीत भी मेरा ही लिखा था // ©COPYRIGHT 2020 All rights reserved to Writomaniacs.